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Jaane Kahaa ??? The Revolution भाग 35

अपडेट 35

 

भारतभर मे एक साथ अनेक शहरो मे खुल्लेआम पोस्टर्स चिपकाने का अंजाम भी शाम तक देखने को मिलने लगा| अभी तो बड़े बड़े न्यूज पेपर्स में दुसरे दिन सुबह न्यूज छपनेवाली थी, लेकिन बड़े बड़े नेताओ के इशारे पर पुलिस ने रंगेहाथ कई पोस्टर्स चिपकानेवालो को पकड़ लिया था|जब की क्रान्तिकारियो को अंदाजा था ही की अनेक लोगो को अरेस्ट किया जायेगा और पुछताछ शुरु भी हो जायेगी। क्रांतिकारीयो ने इस मे भी एक अनोखा प्रयोग किया था। ज्यादा से ज्यादा ऐसे लोगो को पसंद किया गया था जो पुलिस के मार के आदी हो और पुलिस की टोर्चर को आराम से जेल पाये। मान लो अगर कोइ ऐसा भी पकडा गया की पुलिस की मार सहन नही कर पाये या पुलिस के मार से डर जाये तो भी वो कुछ बताने लायक नही होगा क्युकी कहा से पोस्टर्स आये और कहा छपवाये गये ये कीसी को खबर ही नही थी। इसिलिये पुलिस उस माहोल मे ये हालत मे ही नही होगी की कुछ साबित कर पाये। उतना ही नही ऐसे लोगो को किस ने पोस्टर्स चिपकाने को बोला गया था वो नाम भी ऐसे आदमी पुलिस को बता नही पायेंगे।

क्रांतिकारीयो का ये शक बिल्कुल सही था। उसी दिन शाम से क्रांतिकारीयो  को न्युज आने लगी की क्या क्या हो रहा था। देर रात तक धीरे धीरे सारे हिन्दुस्तान की राजनीती को असर करता हुवा एक बडा विस्फोट हो चुका था। रातो रात केबिनेट मिनिस्टर्स की मीटींग होने लगी और एक एक राज्य मे भुचाल सा हो चुका था।

दुसरे दिन अखबारो की हेडलाइन्स क्रांतिकारीयो की खबर से भरा पडा था। “क्रांतिकारीयो का तीसरा विस्फोट”, “रीवोल्युशनरीज मिशन ओन टार्गेट”, “हिन्दुस्तान की राजनीती मे भूकम्प” जैसी हेडलाइंस छप चुकी थी। इतना ही नही कुछ जानेमाने और सब से ज्यादा बीक्री होते हुवे अखबारो के तंत्रीओ ने तो मंत्रीओ से पैसा वसुल करना भी शुरु कर दिया था की उन नेतालोगो की आबरु नीलाम न हो पाये।

 

हिन्दुस्तान के हर राज्य मे इमरजंन्सी केबिनेट मीटिंग बुलाइ गई और नेतालोगो ने एकदुसरे से लाइटनींग कोल्स कर दिये और हर राज्ये मे जांच समिति की रचना भी कर दी गइ। कही कही तो सीबीआइ इंकवायरी का प्रस्ताव भी रखा गया। पुलिस की तो समज लो दिन रात की नींदे हराम हो चुकी थी। इसिलिये अपना सारा गुस्सा निकालने के लिये पुलिस ने कइ निर्दोष लोगो को पकडा, पीटा, टोर्चर किया, धमकिया दी लेकिन दो दिन तक कुछ हाथ नही आया। क्युकी जो लोग पकडे गये थे उनमे से कोइ कोइ लोगो को पुलिस की मार की हमेशा से आदत थी इसिलिये कोइ कुछ नही बोला। और कुछ लोगो ने अगर नाम भी बताया की ये लोगो ने हमे ये काम सौपा था तो उन लोगो को भी गीरफतार किया गया। लेकिन फिर माल कहा से आया था, कैसे आया था उस की भी तपास की गइ तो उन्ही ट्रान्सपोर्ट कम्पनीयो तक बात पहुची जो खुद नेतालोगो के गुलाम थे। उन ट्रान्सपोर्ट के मालिको को भी सताया गया। लेकिन वे भी तो नेतालोगो की साठ गाठ मे शामिल नीकले तो यही बताया गया की उन कम्पनीयो के ट्रक्स मे कब पोस्टर्स गये वो पता ही नही चला। समाधी ट्रस्ट के पोस्टर्स की बात आयी तो आखिर मे उंगली सब नेतालोगो की ओर ही उठी क्युकी समाधि ट्रस्ट पर शक करना तो समजो हिन्दुस्तान की आमजनता को छेडना बराबर ही था। और कोइ नेता अपना नाम पेपर मे छपे ये उन नेतालोगो को मंजुर नही था। आखिर मे सब के सब को छोडना ही पडा और कुछ 15-20 दिनो मे सारा मामला नेतालोगो ने खुद ही समेट लिया। लेकिन बाहर देश की जनता मे आक्रोश बढता ही चला जा रहा था। चारो ओर प्रदर्शन, धरना, सुत्रोच्चार की श्रुंखला शुरु हो चुकी थी।

 

ये सारी प्लानिंग जय ने अपने साथी दोस्तो को समजाइ ही थी। इसिलिये कुल मिलाकर दो दिन तक सिर्फ तपास के नाम पर सिर्फ पुलिस की नीन्द खराब हुइ। और 15-20 दिनो के बाद भी पुलिस, नेता सब हारे, थके लेकिन एक भी मार्ग क्रंतिकारीयो तक नही पहुच पाया। ये मास्टर स्ट्रोक था जय & कम्पनी का जिस का नतीजा तीसरे दिन देखने को मिला। सारी आमजनता राजनीती के खिलाफ जाने लगी थी। कइ जगहो पर म्युनिसिपालिटी के इलेक्शन थे, कइ ओर जगहो पर अलग अलग छोटे-मोटे इलेक्शन्स थे वहा प्रचारकार्य चल रहा था। राजनीती के वोलन्टीयर्स को वहा पत्थरो से, जुतो से मारा गया और इस तरह जनशक्ति ने अपना आक्रोश दिखाना शुरु कर दिया। चौथे दिन तक तो ये समस्या संसद मे गुंजने लगी और अगले दो दिनो तक संसद मे केवल घमासान आक्षेपबाजी हुइ। नेतालोग आमने सामने लडने पर उतर आये थे। ये भी क्रांतिकारीयो की जीत ही थी की आज तक आम जनता लडती जगडती थी और आज उसी आमजनता ने नेता को लडने पर मजबुर कर के रख दिया था। जिस की वजह से राजनीती मे पहलीबार सारे सांसद एक दुसरे से लडते नजर आ रहे थे। अब भारत मे राजनीती मे जबरदस्त परिवर्तन के आचार नजर आ रहे थे।

 

सब से बुरा हाल खेंगारसिंघ का हुवा था। क्युकी क्रांतिकारीयो का उस पर तो ये तीसरा वार था और ब्रह्मास्त्र जैसा वार था, अचुक वार था। पुरे भारतवर्ष के नेतालोगो ने खेंगारसिंघ को ट्रंक कोल, लाइटनिंग कोल से गालियो की बौछार लगाइ थी। उसे इस्तिफा देने का जोर हाइकमांड से आया हुवा था। अब तक सिर्फ इसिलिये खेंगारसिंघ बचा हुवा था क्युकी उस के पास कइ नेताओ की चोटी हाथ मे थी। लेकिन अब लगता था की हाइकमांड के आगे उसे जुकना ही होगा। कुल मिलाकर जय की तेज दिमागवाली धारा सारे हिन्दुस्तान मे अपने आप क्रांति की ज्वाला को हवा दे गइ थी।

आज पोस्टर्स चिपकाये हुवे सात दिन बीत चुके थे। सारी टोली आराम से सिगरेट पी रही थी। साजन की पहली शर्त थे की कोइ भी कार्य करने के बाद कम से कम सात दिनो तक कोइ कीसी को मिलेगा नही और अगर मिलेगा तो कार्य के बारे मे बिलकुल नही बोलेगा। अगर कोइ मेसेज एकदुसरे को देना हो तो कोडवर्ड भाषा मे देना होगा। सात दिनो के अन्दर जय ने ये भाषा उदयन से सीख ली थी। लेकिन सात दिन के बाद फिर से एक मीटिंग आयोजीत की गइ। इस बार जगह थी ‘अम्बाजारी गार्डन’। दुसरी कोलेज केम्पस के बिल्कुल पासवाली जगह। ये भी जय का ही सुजाव था की अगर बात ही करनी है तो पब्लिक प्लेस मे ही करे, ऐसा लगे की  ये कोलेजीयन लोग मस्ती कर रहे है। क्युकी मी. & मीसीस रीषी को तो ये मिशन से दुर किये हुवे 1 महिना हो चुका था। बस बाकी सब यंगस्टॅर्स ही इकठ्ठा थे तो बातचीत अगर पब्लिक प्लेस मे करे तो उल्टा शक कीसी को नही होगा। ये भी मास्टर प्लान का ही हिस्सा था।

अम्बाजारी गार्डन मे दोपहर 4 बजे मीटिंग आयोजीत की गइ। जय की सुचना थी की बातचीत हसकर और कोलेज लेंग्वेज मे की जाये ता की देखनेवालो को यही लगे की कोलेज के यंगस्टॅर्स मोजमस्ती मे डुबे हुवे है और ज्यादा ध्यान उनलोगो पर ना आये।

मीटिंग मे सब से पहले सब ने जय को बधाइ दी और सर्व स्वीक्रुती से जय को अब क्रांतिकारीयो का लीडर घोषित किया गया। जय ने भी सब को धन्यवाद दिया। सब ने जय की इस खेलदीली को स्वीकार कर के उन की बात सुनी, समजी और उस पर अमल भी किया तो ये नतीजा रहा और आगे भी अगर ऐसा ही माहोल रहा तो और सफलता मिलेगी। अब जय ने सब के आगे अपना मास्टर प्लान का प्रस्ताव रखा की अब साजन उसे रणवीरसिंघ के पास ले जायेगा और इस वक्त रणवीरसिंघ का पुरा ध्यान अपने बाप खेंगारसिंघ को बचाने पर लगा होगा तो वो जय और साजन को एक से ज्यादा बार आने को बोलेगा। हो सकता है की उस समय मे मिली से मिलने का मौका मिले और आगे कुछ प्लानिंग हो सके। जय के इस प्रस्ताव को भी सब ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। लेकिन ये प्रस्ताव अमरभाइ और संजयभाइ से छिपाया गया था।

 

क्यु ऐसा किया गया वो सिर्फ अकेला जय ही जानता था। अब दोस्ती ही इतनी गहरी थी और उपर से ये सफलता इसिलिये कीसी ने भी जय को इस बारे मे कोइ प्रश्न नही किया और कीसी ने ये जोर नही दिया की ये बात उन दोनो साधको तक पहुचाइ जाये। आजतक वे लोग जो करते थे वो आख बंध कर के सिर्फ उन दो साधको के इशारे पर करते थे जिस मे खतरा भी था। आज पहलीबार जय के प्लानिंग से ये माहोल था की अगर मरते तो ये दो साधक, बाकी सब पर उंगली उठने का सवाल ही नही उठता था। इसिलिये इस मीटिंग मे अंत मे भी एक के बाद एक को रवाना होना होगा इस फैसले पर सब से पहले उन दोनो साधको को रवाना कर दिया गया बाद मे जय ने उपर्युक्त प्रस्ताव रखा था। मीटिंग के आखिर मे ये तय हुवा की दुसरे ही दिन साजन और जय रणवीरसिंघ से मिलने के लिये जयपुर के लिये प्रस्थान करेंगे।

 

जय & कम्पनी मे से कीसी को और खुद जय को भी ये पता नही था की ऐसे क्रांति के मास्टरपीस विचार कैसे और कहा से आते थे। बस जय अपनी सिक्स्थ सेन्स के सहारे दुर की सोचकर और परमात्मा की शक्तियो पर द्रढ विश्वास रखकर आगे बढता ही जा रहा था और उसे पहले ही कदम पर सफलता मिल रही थी।

जैसे दिन के बाद रात आती हैम उसी तरह अगर ऐसे ही क्रान्ति शुरु रहती तो शायद और कुछ समय या महिने या वर्ष तक क्रांति यु ही चलती रहती और कीसी को पता भी नही चलता की ये कौन कर रहा है। लेकिन जय ने जब फैसला किया रणवीरसिंघ से मिलने का उस का अंजाम क्या होगा ये उसे पता नही था। कौन जाने कुदरत अब उस के साथ क्या खेल खेलनेवाली थी की उस का ये कदम उसे एक नयी क्रांति करने पर मजबुर कर देगा जिस क्रांति का ध एंड केवल ‘जैल’ ही होना था।

*****

दुसरे दिन जय और साजन जयपुर के लिये रवाना हुवे। सब दोस्तो ने इन दोनो को बेस्ट लक किया। जय पहलीबार अपनी कजिन मिली से मिलने चला था। आज पहली बार उसके रोंगटॆ खडे हो रहे थे। केवल एक महिने मे जय ने अपने लाइफ बदल दी थी। दुसरे दिन वे लोग जयपुर पहुचे। साजन उसे अपने महल जैसे बंगलो पर ले के गया। बंगलो के बाहर रिक्शो खडी हुइ।

 

साजन के डेड जयपुर के मेयर थे और साथ साथ समाधि ट्रस्ट के इंटरनेशनल लेवल के ट्रस्टी भी थे। उन का सारा दिन मीटिंग्स मे चला जाता था। बहुत कम समय बाप-बेटे को मिलता था। आज भी साजन के डेड घर पर नही थे। जय ने बंगलो के बाहर नाम की प्लेट भी पढी और साजन के पिताजी का नाम भी पहलीबार जान लिया। लेकिन उस वक़्त एक घटना हो चुकी थी जिस के बारे मे जय बिल्कुल अंजान था।

अगर जय अपने माताजी राजेश्वरीदेवी को बताता की वो साजन के घर जयपुर जा रहा है और उस के डेड का नाम बताता तो शायद जय की जिन्दगी कुछ और होती, उल्टा अगर जय क्रांति के बारे मे भी अपनी मा से बात करता तो भी बात कुछ और होती, तीसरा अगर साजन के डेड हाजिर होते और जय को देखते और जान पहेचान की बाते होती तो भी बात कुछ और होती। लेकिन संजोग ऐसे थे की कुछ भी नही हुवा।

साजन और उस के पिताजी की असली पहेचान जय को क्रांति के अंजाम जब जय को अकेले को भोगतना पडा तब हुइ थी।

 

सजन ने अपनी जेब से डुप्लिकेट चाबी से मैइन गेट का लोक खोला और गार्डर से होकर बंगलो के दरवाजे तक पहुचे और उसे भी डुप्लिकेट चाबी से खोलकर दोनो अन्दर चले गये। आलिशान दिवानखंड था और उपर के भाग मे कमरे थे। फ्रेश होकर सब से पहले साजन ने रणवीरसिंघ का कोंटेक्ट किया तो उस ने शाम का वक़्त दिया। कुछ ही देर मे साजन के डेड का फोन आया की वे अचानक लंडन जा रहे है। दोनो अकेले थे पुरी दोपहर आराम किया और शाम को साजन के डेड की कोंटेसा कार लेकर नीकल पडे रणवीरसिंघ से मिलने।

साजन के डेड का बंगलो रीवर के पास सांगानेर टाउनशिप से आधा कीमी दुर था और रणवीरसिंघ का कोटेज मालविका नगर इंडस्ट्रियल एरीया के पीछे जो रीजर्व्ड फोरेस्ट था जिस का नाम बिन्दियाका फोरेस्ट रखा गया था उस के बराबर पास था। बस वो जंगल ही रणवीरसिंघ और उस के बाप खेंगारसिंघ को काम आता था। एक और फार्महाउस भी जंगल मे कुछ दुर अन्दर दुसरे छोड पर और राजविलास होटेल से 2 कीमी दुर बनाया गया था। अपने बंगलो से फार्महाउस तक जाने के लिये करीब एक घंटे का तो जंगल मे सफर करना पडता था। फिलहाल तो साजन और जय उस की कोठी जैसे कोटेज आर.के. विला पर पहुचे थे। एक बडा सा गार्डॅन से होते हुवे दोनो ड्रोइंग रुम मे पहुचे। आलिशान दिवानखंड जिस मे कइ प्राणीयो की खाल, दिवारो पर शस्त्र टांगे हुवे थे। लगता था कोइ रजवाडे के महल मे आ पहुचे है। फर्निचर ऐश ब्राउन कलर का था। एक बडे सोफे चैर्स पर दोनो बैठ गये। नौकर ने उसे पानी दिया और दोनो राह देखने लगे रणवीरसिंघ की।

15 मिनिट के बाद रणवीरसिंघ उपर से सीढीया उतरकर आ रहा दोनो ने देखा। दिवारखंड से ही सीढीया उपर के फ्लोर पर जा रही थी। ब्लेक शाइनींग स्ट्रिप्स वाला शर्ट जिस के उपर के बटंन्स खुल्ले थे और छाती पर एक बडी सोने की चैन जिस के उपर वाघ के दो नाखुन वाला पेंडल पहने था और हाथो मे सोने की लकी जुल रही थी। दोनो हाथ से चार उंगलीयो पर सोने और हीरेजडीत अंगुठीया पहनी हुइ थी। नीचे लाइटीश ब्राउन कोटन जींस पहना था। कमर पर बडा बेल्ट था और ब्लेक जंगल मे काम आनेवाली लेधर शुज पहन रखे थे। राजपुतानी मुछे और आखे शराबी, नशीली थी। पुरा 6 फीट हाइट और चौडी छाती, स्नायुबद्ध शरीर और खुखार चेहरा। आते ही रणवीरसिंघ सोफा चैर पर बैठते हुवे साजन की और बोला,”तुम तो मेयरसाहब के बेटे हो ना?”

साजन, “यस, रणवीरभाइ हम तो मिल चुके है तीनचार बार।“

रणवीरसिंघ, “हा याद आया हम कइ बार मिल चुके है, ये आजकल कुछ याद नही रहेता ना इसिलिये...।“

साजन, “यस रणवीरभाइ मुजे थोडा बहुत पता है न्युज पेपर्स के माध्यम से। साले कौन है जो सब पोलिटिशयन्स के पीछे पडे है?”

इतना केहकर साजन ने जय के सामने देखा और रणवीरसिंघ का ध्यान नही था तो आखे मारकर मुछ मे ही हस दिया।

 

रणवीरसिंघ,” पता नही साले कौन है? साली पुलिस भी हरामजादो को पकड नही पा रही है। खैर छोडो न इस बात को। ह्म्म..तुम बताओ बात क्या थी वो बताओ, मुजे मिलने क्यु आये हो ?”

साजन ने जय की पहचान करवाकर बोला, “ये जय है, गुजराती है और अच्छा क्रिकेटर भी है। आप तो जानते है की आज के समय मे क्रिकेट मे आगे बढना कितना मुश्किल है तो सोचा की आप के पास ले आउ। आप अगर कुछ हेल्प कर देते तो इस का नाम बन सकता है। बहुत अच्छी बेटिंग कर लेता है।“

जय ने खडे होकर मुस्कुराकर रणवीरसिंघ से शेकहेंड किया। बडा फौलादी हाथ था रणवीरसिंघ का। जय मन ही मन सोच रहा था की इस के पंजे से नीशी की इज्जत बची इतना ही काफी है। लेकिन साथ मे ये भी सोचता रहा था की इस ने फिर भी निशी की क्या हालत की होगी।“

रणवीरसिंघ ने थोडी देर जय को देखा और फिल बोला, “देखो यार बात तो थोडी मुश्किल है। आप लोग जानते ही होंगे की क्रिकेट मे आगे बढना कितना मुश्किल है।“

साजन,” अरे क्या बात कर रहे हो रणवीरभैया, आप के होते हुवे कोइ काम मुश्किल हो ही नही सक्ता, मै तो जानता हु ना आप को। अगर आप की नजर हुइ तो इसे आसानी से आगे जाने का मौका मिल ही जायेगा ये मुजे पक्का विश्वास है।“ सजन ने मस्का लगाया।

रणवीरसिंघ हस दिया, “बडे चालाक हो यार अपने डेड की तरह ही। अब तु इसे यहा तक ले आया है तो कुछ ना कुछ तो करना ही होगा ना” फिर रणवीरसिंघ ने आखो के इशारे से साजन को बताया की वो उस के साथ अकेले मे बात करना चाहता है और जय को बाहर भेज दिया जाये।

 

साजन ने फौरन जय को बाहर जाने का इशारा किया और जय खडा होकर रणवीरसिंघ को नमस्कार कर के बाहर गार्डन मे चला आया। अंदर क्या बातचीत हो रही होगी वो शायद जय को अन्दाजा था की जय को आगे बढाने के बदले मे रणवीरसिंघ को क्या फायदा होगा ?

जय बाहर आकर गार्डन की इजीचैर मे बठा रहा, लेकिन दो मिनिट के बाद उस ने सोचा की इधर उधर नजर दौडाइ जाये। मौका बहुत कम समय का था, लेकिन जय ने परमात्मा और अपने गुरुदेव का नाम लेकर स्पीड से गार्डन घुमना शुरु किया। फिर हल्के से दबे पाव वो कोटेज के पिछवाडे भाग मे भी चला गया। लेकिन वहा भी 5 मिनिट छानबीन करने पर कोइ मिला नही। फिर वो तेजी से वापस आने लगा। फिर से घुमकर वो वापस आया तो साजन और रणवीरसिंघ बस मुख्य द्वार से बाहर ही आ रहे थे। जय दोनो को नजर न आये इसी तरह स्पीड से उस के बहुत करीब आ गया और नजर घुमा के जैसे गार्डन देख रहा हो ऐसी एक्टिंग करने लगा।

फिर साजन ने रणवीरसिंघ को शेकहेंड किया और थेंक्स थेंक्स बोलकर जय के पास पहुच गया और रणवीरसिंघ को बाय बोलकर जय के साथ हो गया। मौका देखकर जय ने भी रणवीरसिंघ को मुस्कुराकर हाथ जोडे और बाय, थेंक्स बोलकर दोनो दोस्त कोटेज से बाहर नीकले। कोटेज के बाहर नीकलकर ब्राउन कलर की कोंटेसा मे बैठकर दोनो वापस आने लगे। रास्ते मे एक चौराहे पर साजन ने कार रोकी और सिगरेट के दो पेकेट्स खरीदे और वापस बंगलो पर आ गये।

कुछ समय के बाद फ्रेश होकर साजन ने डीएसपी नम्बर 1 बोटल नीकाली और एक ग्लास थोडा ठंडा पानी, चना, मेच बोक्ष और सिगरेट पेकेट्स के साथ गार्डन मे आ गया। रास्ते मे जय ने पुछा था की क्या हुवा तो साजन ने कहा आराम से बाते करते है न। इसिलिये रास्ते मे केवल इधर उधर की बाते हुइ और वे दोनो फिर साजन के बंगलो पर पहुचेकर दो चैर पर आमने सामने बैठे हुवे थे। साजन ने बोटल ओपर कर के जय को ओफर किया लेकिन जय ने सिर्फ सिगरेट लिया, इसिलिये साजन ने एक ग्लास पेग बनाया और दो सिगरेट जलाइ।

जय ने कुछ देर के बाद साजन को पुछा, “तेरे घर मे कोइ नौकर नही है क्या ?”

साजन ने हसने लगा और बोला, “यहा नौकर की क्या जरुरत है भाइ ? न तो मेरे डेड टिकते है यहा पर और ना ही तो मै ।“

जय, “तो फिर ये घर की रखवाली कौन करता है ?”

साजन, “सरकारी मुलाजिम और कौन ? डेड को जयपुर म्युनिसिपालिटी की और से चौथे वर्ग के आदमी मिल जाते है उन मे से ही कोइ गार्डनिंग कर जाता है तो कोइ साफसफाइ कर जाता है।कोइ चीज गुम होने का सवाल ही नही उठता क्युकी बंगलो की मुख्य चाबीया लोक & की मे रहती है और बाकी बाहर पडी है वो मजाल है की कोइ चुराने की कोशिश करे। वैसे भी मेरे डेड से सब प्यार भी करते है और डरते भी है इसिलिये जरुरत पडने पर सिर्फ मेरे डेड ही खडे रह सकते है। सारा जयपुर मेरे डेड की इज्जत करता है।

जय ने ह्म्म कहकर सिर हिलाया। फिर जय ने पुछा, “अच्छा अब तो बता की रणवीरसिंघ ने क्या कहा ?”

साजन ने ग्लास उठाकर एक घुट पीया और दुसरी बार दो सिगरेट जलाकर एक जय को दी और एक खुद कश लगाकर बोला,” वो तो कुछ राजनीती की बाती ही हुइ है, क्युकी आजकल वो अपने बाप को लेकर ज्यादा परेशान है, वो तो होना ही था वैसे सालो की हमने अच्छी मारी है ना। लेकिन तेरे बारे मे बोला की वो देखेगा और तुजे एक दिन के बाद अकेला फिर से बुलाया है। क्युकी मैने कहा है की शायद उस दिन मै जयपुर मे नही हु और मेरा दोस्त अकेला आयेगा। वैसे भी तु भी तो अकेले मे ही बात करना चाहता था न इसिलिये मैने ही सामने से कह दीया और उस को भी शायद ये ज्यादा अच्छा लगा की तु उसे अकेले मे ही मिले।“

जय, “ये तुने बिलकुल ठीक किया। लगता है की अपने प्लान के हिसाब से ही गाडी आगे जा रही है।“

साजन, “तु सही है दोस्त ऐसा लगता है जैसे तु स्क्रिप्ट राइटर है हमारी स्टोरी का, जैसे तु केहता है वैसे ही आज बाते बनी है। लेकिन एक बात पुछु ?”

जय, “अरे पुछ ना, दोस्ती मे परमिशन नही होती यार।“

साजन ने एक बडा घुट पीया और कश लगाकर बोलाम “आगे क्या करेगा ये तो बता ?”

जय, “सिम्पल मिली को ढुंढने की कोशिश करुंगा और क्या ?”

साजन, “लेकिन तुजे ऐसा क्यु लगता है की मिली उस के बंगलो पर ही होगी ?”

जय, “बिल्कुल नही मानता की मिली वहा होगी।“

साजन, “तो फिर ?”

जयम “अरे तु ही तो कहता था की उस का एक फार्म हाउस भी है।“

साजन, “अरे हा यार, तो क्या तुजे लगता है की मिली वहा होगी ?”

जय, “100% आइ एम स्योर की मिली वहा ही है ?”

साजन, “ये तु दावे से कैसे कह सक्ता है ?”

जय ने हसकर पेंट के पोकेट से वो लेटर नीकाला जो मिली ने क्रांतिकारीयो के नाम लिखा था और बोला, “देखो ये स्टेम्प जयपुर की है यानी की जिसने भी पोस्ट किया है उस ने जयपुर से किया है।“

साजन, “लेकिन इस से ये तो साबित नही होता है की मिली यहा है। कोइ भी आदमी यहा जयपुर मे आके भी तो पोस्ट कर सकता है ना।“

जय, “तेरी बात शायद सही है लेकिन दोस्त इतना सोच की कोइ ऐसा क्यु करेगा की पोस्ट जयपुर मे आकर करे ?”

साजन, “हा ये भी ठीक है चल मान लिया की मिली जयपुर मे है, लेकिन रणवीरसिंघ के फार्महाउस पर ही है ऐसा दावे के साथ तु कैसे मान सक्ता है ?”

जय, “दावे के साथ नही बल्की आत्मविश्वास के साथ कह सक्ता हु की मिली फार्महाउस पर ही है, क्युकी फार्महाउस यहा से बहुत दुर होगा और अगर रणवीरसिंघ ज्यादा दुर फार्महाउस से रहा होगा तभी तो मिली को वक़्त मिला होगा खत लिखने का। सिम्पल लोजिक है क्युकी अगर कोटेज मे मिली होती तो रणवीरसिंघ के होते हुवे लेटर कैसे लिखती ? दुसरा ये भी है की उस फार्महाउस मे कोइ तो ऐसा है जो मिली को हेल्प कर रहा है और वो भी शायद पैसो के खातिर या रणवीरसिंघ के खिलाफ होगा, वरना ये लेटर ह्म तक नही पहुचता यार ।“

साजन, “यार तेरा भेजा तो डीटेक्टीव जैसा काम कर रहा है।“

जय, “मैने पहले भी कहा है था की मै कोइ काम अन्धेरे मे नही करता यार, अभी मुजे और भी एक शक है लेकिन वो मै बाद मे बताउंगा।“

साजन, “अबे यही आज बता दे ना यार कौन सुन ने वाला है यहा ?”

जय, “साजन, हर एक बात का एक निश्चित समय आता है। थोडी धीरज रख एक दो दिन मे ही तुजे बहुत कुछ देखने को मिलेगा यहा।“

साजन ने ग्लास खाली किया और बोला, “आइ होप सो यार, लेकिन बात तो बता ना यार आगे तु क्या सोच रहा है, प्रोमिस यार कीसी को नही बताउंगा बस।“

जय, “तु जल्दबाजी बहुत करता है यार, थोडे दिन ठहर जा बस तुजे अपने आप शायद बहुत कुछ फर्क समज मे आने लगेगा। जितना हम सोच रहे है उतनी आसान ये क्रांति नही है यार। तुमलोगो ने जो किया वो पहले से ही आग लगी हुइ थी। लेकिन मेरे आने के बाद जो हुवा है उस से ये लोग शांती से नही बैठनेवाली देखना और एक दिन ये पानी हमारे नीचे जरुर आयेगा ही।“

साजन, “यार कभी कभी ना तुम ये डरी डरी बाते ज्यादा बोलने लगता है।“

जय, “यार वास्तविकता को हमे स्वीकार ही करना पडता है ना। अगर मै जो बोल रहा हु और अगर वैसा ही माहोल चल रहा है तो समज ले की वो दिन दुर नही की पुलिस हमारे पीछे होगी। और ये बात डरने डराने की नही बल्की अभी से सावधानी रखने की है यार ।“

साजन ने दुसरा राउंड भी शुरु कर दिया था। और धुआ हवा मे उडाते हुवे बोला,” ठीक है यार मौका तो आने दो देख लेंगे सालो को।“

फिर कोइ खास बाते नही हुइ और दोनो दोस्तो ने बाहर जाकर डीनर कर लिया और सो गये। लेकिन जय सोचता ही रहता था की आगे क्या होगा? कौन जाने कहा जा के जय की सोच किस के साथ टकरायेगी ??? कौन जाने कहा ???

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14 Comments

shweta soni

21-Jul-2022 11:08 AM

Nice 👍

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PHOENIX

21-Jul-2022 11:22 AM

Thanks

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Punam verma

21-Jul-2022 09:41 AM

Nice

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PHOENIX

21-Jul-2022 11:22 AM

Thanks

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Abhinav ji

21-Jul-2022 09:06 AM

Nice

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PHOENIX

21-Jul-2022 11:22 AM

Thanks

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